मनी लॉन्ड्रिंग का डर और 15 दिन की कैद, जानिए कैसे नीमच पुलिस ने बुजुर्गों को जाल से निकाला, पढ़े पूरी खबर।
अपराध
S S Kachhawa
मनी लॉन्ड्रिंग का डर और 15 दिन की कैद, जानिए कैसे नीमच पुलिस ने बुजुर्गों को जाल से निकाला, पढ़े पूरी खबर।
Updated : December 24, 2025 05:12 PM
नीमच। जिले की साइबर सेल ने तत्परता और सूझबूझ का परिचय देते हुए एक बुजुर्ग दंपति को साइबर ठगों के चंगुल से छुड़ाकर उनकी जीवन भर की जमा पूंजी के 60 लाख रुपये डूबने से बचा लिए। ठगों ने दंपति को पिछले 15 दिनों से मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाकर डिजिटल अरेस्ट कर रखा था। इंदौर क्राइम ब्रांच से मिली सूचना के महज 7 मिनट के भीतर नीमच साइबर सेल की टीम मौके पर पहुंची और इस बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया।
*क्या था पूरा मामला?*
शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त विकास नगर निवासी एक बुजुर्ग दंपति को 8 दिसंबर को एक अनजान वॉट्सऐप कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को 'दिल्ली पुलिस कमिश्नर' बताते हुए डराया कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर केस में आया है। ठगों ने बुजुर्गों को इस कदर डराया कि यदि उन्होंने किसी को बताया, तो उनके बच्चों को भी जेल भेज दिया जाएगा।
दंपति इतने भयभीत थे कि वे अपनी पेंशन और जीवन भर की गाढ़ी कमाई की 60 लाख रुपये की एफडी तुड़वाकर ठगों द्वारा बताए गए खाते में ट्रांसफर करने की तैयारी कर चुके थे।
*बेटी के शक ने बचाई पिता की पूंजी*
जब बुजुर्ग दंपति ने अपनी बेटी से एफडी ट्रांसफर करने के संबंध में चर्चा की तो उसे कुछ संदिग्ध लगा। बेटी ने तत्काल इंदौर क्राइम ब्रांच के उप-निरीक्षक शिवम ठक्कर से संपर्क किया। जिन्होंने बिना देरी किए नीमच साइबर सेल प्रभारी प्रदीप शिंदे को सूचना दी।
*7 मिनट में रेस्क्यू और 2 घंटे की काउंसलिंग*
पुलिस अधीक्षक अंकित जायसवाल के निर्देशन में साइबर सेल की टीम सूचना मिलते ही मात्र 7 मिनट में बुजुर्ग दंपति के घर पहुंची। टीम ने देखा कि दंपति बुरी तरह डरे हुए थे और कुछ भी बोलने को तैयार नहीं थे। पुलिस ने मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग का सहारा लिया और करीब 2 घंटे की समझाइश के बाद उन्हें अहसास दिलाया कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कानून में कोई प्रावधान नहीं है।
*SP अंकित जायसवाल ने दी जागरूकता की सीख*
पुलिस अधीक्षक अंकित जायसवाल ने स्वयं बुजुर्ग दंपति से मुलाकात कर उनका हाल जाना। उन्होंने बताया कि आजकल ठग ईडी, सीबीआई, या नारकोटिक्स विभाग का फर्जी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करते हैं और नशीले पदार्थों या मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाने की धमकी देते हैं। उन्होंने अपील की कि ऐसे कॉल्स से डरे नहीं और तत्काल पुलिस को सूचित करें।