पुण्यतिथि विशेष: परंपरा और प्रेम की मिसाल थे दशरथ जी, भाई और पिता के जाने के बाद बने थे परिवार का संबल, आज प्रथम पुण्यतिथि।
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S S Kachhawa
पुण्यतिथि विशेष: परंपरा और प्रेम की मिसाल थे दशरथ जी, भाई और पिता के जाने के बाद बने थे परिवार का संबल, आज प्रथम पुण्यतिथि।
Updated : January 12, 2026 08:51 AM
नीमच। जीवन में कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी कमी कभी पूरी नहीं की जा सकती। गांव दोवड़ के सामाजिक सरोकारों के अग्रदूत और मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी स्व. दशरथ जी नागदा भी एक ऐसी ही शख्सियत थे। आज उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर पूरा क्षेत्र और नागदा परिवार उन्हें अश्रुपूरित नेत्रों से याद कर रहा है।
*जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया*
स्व. दशरथ नागदा का जीवन संघर्ष और समर्पण की मिसाल रहा। उन्होंने बहुत छोटी उम्र से ही घर की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली थी। परिवार के 'कर्ता-धर्ता' के रूप में उन्होंने न केवल घर की नाव संभाली, बल्कि सबको साथ लेकर चलने के आदर्श को भी चरितार्थ किया। वर्ष 2000 में अपने बड़े भाई स्व. राजाराम जी और 2013 में अपने पूज्य पिताजी के निधन के बाद, उन्होंने पूरे परिवार को एक सूत्र में पिरोए रखा।
*सामाजिक जीवन में अमिट छाप*
दशरथ जी केवल अपने परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए मददगार व्यक्तित्व थे। उन्होंने लगभग 9 वर्षों तक अफीम फसल के मुखिया के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वे अपनी ईमानदारी, व्यवहार कुशलता और सेवाभावी स्वभाव के कारण जन-जन के प्रिय थे। सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रियता और सबका साथ निभाने की कला ने उन्हें गांव में एक विशेष पहचान दिलाई थी।
*विरासत में छोड़ी सादगी*
उनके करीबियों का कहना है कि दशरथ जी अपने पिताजी की तरह ही बेहद सरल और सहज स्वभाव के धनी थे। वे हमेशा दूसरों की सेवा के लिए तत्पर रहते थे। आज भले ही वे शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें और उनके द्वारा दिखाए गए संस्कार आज भी परिवार का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
आज उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर नागदा परिवार और ग्रामीणों ने भगवान से प्रार्थना की है कि पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और परिवार पर सदैव अपना आशीर्वाद बनाए रखें।