नुक्कड़ नाटक के जरिए किसानों को सिखाए पुनर्योजी खेती के गुर, आमदखेड़ी में हुआ आयोजन।
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S S Kachhawa
नुक्कड़ नाटक के जरिए किसानों को सिखाए पुनर्योजी खेती के गुर, आमदखेड़ी में हुआ आयोजन।
Updated : December 29, 2025 06:08 PM
मनासा। रासायनिक खेती के बढ़ते दुष्प्रभावों को रोकने और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए अब कला का सहारा लिया जा रहा है। मनासा ब्लॉक के ग्राम आमदखेड़ी में सॉलिडरिडाड संस्था एवं यूरोपीय संघ (EU) समर्थित परियोजना के तहत एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से किसानों को पुनर्योजी कृषि अपनाने का संदेश दिया।
*मिट्टी की घटती उर्वरता पर जताई चिंता*
नाटक के दौरान कलाकारों ने जीवंत प्रस्तुति देते हुए बताया कि किस प्रकार रासायनिक उर्वरकों और जहरीले कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से धरती की उपजाऊ शक्ति खत्म हो रही है। इससे न केवल खेती की लागत बढ़ रही है, बल्कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर संकट मंडरा रहा है। नाटक के जरिए यह संदेश दिया गया कि यदि समय रहते प्राकृतिक पद्धतियों को नहीं अपनाया गया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए खेती करना मुश्किल हो जाएगा।
*इन विषयों पर दी गई व्यावहारिक जानकारी*
कार्यक्रम में किसानों को पुनर्योजी कृषि के मुख्य स्तंभों के बारे में विस्तार से समझाया गया, जिनमें प्रमुख हैं:
* फसल चक्र: मिट्टी के पोषक तत्व बनाए रखने के लिए फसलों को बदलकर बोना।
* हरी खाद व जीवामृत: बाजार के रसायनों की जगह घर पर बने जैविक खाद का उपयोग।
* प्राकृतिक कीट नियंत्रण: मित्र कीटों का संरक्षण और जैविक तरीकों से रोगों का बचाव।
* जल संरक्षण: कम पानी में बेहतर उत्पादन लेने की तकनीक।
*किसानों ने सराहा प्रयास*
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीण किसानों ने नाटक की सराहना की। किसानों का कहना था कि भाषणों के बजाय नाटक के माध्यम से दी गई जानकारी आसानी से समझ आती है। इस दौरान ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि वे अपनी खेती में रसायनों का उपयोग कम कर धीरे-धीरे प्राकृतिक और पुनर्योजी पद्धतियों को अपनाएंगे, ताकि खेती को फिर से लाभ का धंधा बनाया जा सके।